ऑटो ड्राइवर के बेटे ने आईआईटी-मद्रास में बनाई जगह, 90 प्रतिशत रीढ़ की हड्डी की विकलांगता और सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित
नई दिल्ली, 3 सितंबर (आईएएनएस)। अक्सर कहा जाता है कि सपने देखना तो आसान है, लेकिन उन्हें हकीकत में बदलना उतना ही मुश्किल। हालांकि, कुछ लोगों के लिए यह रास्ता और भी कठिन हो जाता है, जब वे किसी शारीरिक अक्षमता से जूझ रहे हों। कुछ ऐसी की कहानी है महज 17 वर्ष के जे. संतोष की।